रुद्रप्रयाग। थाना अगस्त्यमुनि में शराब तस्करी और सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध करने के आरोप में फंसे महेंद्र कुमार (पुलिस लाइन रुद्रप्रयाग) को न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ कुमार ने 20 जुलाई 2026 को दिए गए विस्तृत आदेश में अभियुक्त को BNS की धारा 126(2), 221, 223 में सबूतों के अभाव में दोष मुक्त किया लेकिन 263 (क) में आरोपी पाया । दोषसिद्ध को अपराध धारा 263 (क) भारतीय न्याय संहिता,2023 में कारावास की सजा दण्डादेश पारित ना करते हुए धारा चार अपराधी परिवीक्षा अधिनियम,1958 के तहत सदाचरण की परिवीक्षा का लाभ करते हुए एक साल शर्तों के साथ छोड़ा ।


मामले का विवरण
उपनिरीक्षक जावेद अली द्वारा 25 जुलाई 2025 को दर्ज तहरीर के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। अभियुक्त पर 21 जुलाई 2025 को संदिग्ध वाहन (महिंद्रा बोलेरो UK13TA-0969) के साथ शराब तस्करी और मार्ग अवरुद्ध करने का आरोप था।
आरोप क्या थे?
* 21 जुलाई 2025 को संदिग्ध महिंद्रा बोलेरो को रोका गया।
* वाहन में अवैध शराब बरामद हुई।
* आरोपी महेंद्र कुमार ने मार्ग अवरुद्ध किया और पुलिस टीम को कार्य करने से रोका।
* आरोपी ने खुद को सिपाही बताकर तस्करों को छोड़ने का दबाव बनाने की कोशिश की।
अदालत ने गवाहों के बयानों, CDR, CAF रिपोर्ट, वीडियो और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत जांच के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा। अदालत ने कहा कि मामले में संदेह का लाभ अभियुक्त को दिया जाता है।
परिवीक्षा शर्तें
अभियुक्त को 01 वर्ष की परिवीक्षा पर छोड़ा गया है। इस दौरान अपराध दोबारा न करना, जमानत/बंधपत्र जमा करना, जिला परिवीक्षा अधिकारी की निगरानी में रहना आदि शर्तें लागू हैं।
विशेष
अभियुक्त महेंद्र कुमार यूपी के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के रिश्तेदार बताया जा रहा है। पुलिस विभाग में कई कारनामों में चर्चित सिपाही है महेंद्र कुमार , सूत्र बता रहे है की यूपी के वरिष्ठ अधिकारी का भांजा होने के नाते यह कई बार अब तक विभागीय कार्यवाही से बचता हुआ आया है । देहरादून सहसपुर थाने से कॉल गर्ल रैकेट से साठगाठ के चलते सस्पेंड हो कर चमोली जनपद गया था जहाँ पर चरस तस्करी में लिप्त पाए जाने के बाद सस्पेंड हुआ था ।




