सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना कर रहा जिला प्रशासन: जन संघर्ष मोर्चा
अक्टूबर 1975 से पूर्व खरीदी गई भूमि सीलिंग से मुक्त
विकासनगर/शैलेंद्र कुमार
जन संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में सीलिंग भूमि (चाय बागान भूमि) की आड़ में हो रहे आमजन के उत्पीड़न के खिलाफ तथा माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनुपालना कराने के लिए विकासनगर तहसील में घेराव-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी, विकासनगर की गैर-मौजूदगी में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री रयाल को सौंपा।
मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि जनपद देहरादून के एनफील्ड ग्रांट, जमनीपुर, एटनबाग, ईस्ट होप टाउन, बदामावाला, अंबाडी, रायपुर, जीवनगढ़, कंडोली, कांवली, हरबंस वाला, मोहकमपुर खुर्द, बंजारा वाला माफी, आर्केडिया ग्रांट, मलूका वाला, मिट्ठी बहेड़ी, लाडपुर, नत्थनपुर आदि क्षेत्रों में चाय बागान/सीलिंग भूमि के नाम पर भवन स्वामियों और काश्तकारों को जिला प्रशासन के माध्यम से जबरन शोषण किया जा रहा है।
उन्होंने याद दिलाया कि सीलिंग भूमि मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील संख्या 2697/1984 में दिनांक 24 अक्टूबर 1996 को स्पष्ट आदेश दिया था कि 10 अक्टूबर 1975 से पूर्व खरीदी गई भूमि के खरीदारों को उत्तर प्रदेश सीलिंग एक्ट की धारा 6 उपधारा 3 के तहत सीलिंग अधिनियम से मुक्त रखा गया है। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने कुछ समय पूर्व उत्तर प्रदेश ग्रामीण सीलिंग आरोपण अधिनियम की धारा 6(1)घ व 6(2) के तहत दिनांक 12 जुलाई 2023 और 16 मई 2023 को तहसीलों को उक्त भूमि के क्रय-विक्रय पर रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए।
नेगी ने आरोप लगाया कि इस आदेश के चलते तहसील प्रशासन उन लोगों को भी परेशान कर रहा है, जिन्होंने 10 अक्टूबर 1975 से पूर्व जमीन खरीदी थी। इस आदेश की आड़ में भूमि की खरीद-फरोख्त और दाखिल-खारिज पर भी रोक लगा दी गई है, जिससे वे लोग भी परेशान हो रहे हैं जो इस परिधि में नहीं आते। उन्होंने कहा कि यह फरमान स्पष्ट रूप से माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना है।
मोर्चा ने स्पष्ट किया कि सीलिंग प्राधिकारी/जिला प्रशासन को भूमि की वास्तविक विधिक स्थिति, खरीद का वर्ष, स्वामित्व तथा अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए था। जल्दबाजी में उठाया गया यह कदम किसी भी सूरत में विधिक नहीं ठहराया जा सकता। अगर मुख्य भूस्वामी (जो पहले सीलिंग की जद में थे) ने 10 अक्टूबर 1975 से पूर्व जमीन बेच दी और उस खरीदार ने 1975 के बाद वह जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी, तो वह व्यक्ति भी सीलिंग एक्ट की आड़ में नहीं आ सकता। बिना बैनामा/रजिस्ट्री देखे और पड़ताल किए आमजन को परेशान करना अत्यंत कष्टकारी है।
मोर्चा ने कहा कि अगर कोई भूमि सचमुच सीलिंग की जद में आ रही है तो जिला प्रशासन को विधिक कार्यवाही करनी चाहिए। बिना जांचे-परखे इस आदेश की आड़ में अधिवक्ताओं का भी शोषण हो रहा है और सरकार को भारी राजस्व की हानि हो रही है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला तो ईंट से ईंट बजाने का काम किया जाएगा।
घेराव-प्रदर्शन में मोर्चा महासचिव आकाश पंवार, विजय राम शर्मा, दिलबाग सिंह, मोहम्मद आरिफ, गालिब प्रधान, विवेक गुप्ता, मुजीबुर रहमान सलीम, राम सिंह तोमर, के.सी. चंदेल, मालती देवी, विनोद पड्डा, हाजी असद, युवराज तोमर, संजय गुप्ता, सत्यपाल शर्मा, प्रवीण शर्मा पिन्नी, मो. नसीम, राजकुमार गोयल, रितेश तोमर, मो. इस्लाम, मो. आसिफ, सलीम खान, राजीव गुप्ता, वाहिद कुरैशी, मुमताज, राघवेंद्र सिंह, संगीता पैन्युली, मान चंद राणा, दीपक अग्रवाल, प्रमोद शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष भीम सिंह बिष्ट, मनीष गुप्ता, नीलम अंथवाल, मुकेश रोहिला, फरजाना, अशोक गुप्ता, जितेंद्र ठाकुर, शहजाद, महेंद्र भंडारी, सुरेशानंद बेलवाल, यूनुस, उमराव सिंह, बिल्लू गिल्बर्ट, विनोद शर्मा, नरेश ठाकुर, जगदीश रावत, साक्षी सैनी, पूजा नौटियाल, हिमांशु थापा, हरीश शाह, नाहिद खान, सफीक पांडे, मीडिया प्रभारी अतुल हांडा, सोमपाल, प्रवेश तोमर, रमेश मल्होत्रा, प्रवीण थपलियाल, इंद्रेश रावत, संजय रावत, विकास मल्ला, रमेश थपलियाल, मनीष नेगी, विक्रम पाल, सोनू, शमशाद, गुरुचरण सिंह, चौ. मामराज, क्रिस्टीना, मनीष कुमार, राघव भल्ला, शराफत अली, जसवीर, जसकीरत सिंह, विपिन भारद्वाज, जयपाल सिंह, सलीम मिर्जा, ऋषिपाल, सुनील कुमार आदि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।



