देहरादून। उत्तराखंड पैरावेट संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार को पशुपालन निदेशालय परिसर में सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। इसके साथ ही संगठन ने 1 अगस्त से पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू करने की घोषणा करते हुए पशुपालन निदेशक डॉ. उदय शंकर आर्य एवं मुख्य अधिशासी अधिकारी राकेश नेगी को 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
धरने के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के पैरावेट कर्मी वर्षों से पशुपालन विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें उनके कार्य के अनुरूप मानदेय और अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और परिवार का भरण-पोषण करना भी कठिन हो रहा है।
संगठन का कहना है कि पैरावेट कर्मी विभाग की कार्यप्रणाली की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में उनकी अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने मांग की कि सभी पैरावेट कर्मियों को उपनल की दरों के अनुरूप 25,000 रुपये प्रतिमाह समान मानदेय दिया जाए। साथ ही जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने वाले कर्मियों के लिए दुर्घटना बीमा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा संगठन ने अपनी अन्य लंबित मांगों पर भी शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
उत्तराखंड पैरावेट संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शासन और विभाग ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। संगठन ने शासन से लंबे समय से लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान निकालने की अपील की है।




