“CBI जवाब दो, अंकिता को न्याय दो” — उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा की लड़ाई तेज
देहरादून: भारी बारिश को चुनौती देते हुए उत्तराखंड की महिलाओं और आंदोलनकारियों ने सीबीआई कार्यालय, सीमा द्वार (निकट आईटीबीपी) पर तालाबंदी कर दी। वीरांगना अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने जांच एजेंसी से कई तीखे सवाल पूछे।
आंदोलनकारी विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पहुंचे। पुलिस द्वारा मुख्य द्वार पर भारी बैरिकेडिंग के बावजूद महिलाओं ने दूसरे प्रवेश द्वार तक पहुंचकर प्रतीकात्मक तालाबंदी की। बाद में मुख्य द्वार पर भी ताला जड़ दिया गया।
सीबीआई अधिकारी बाहर आए और अंदर से ही आंदोलनकारियों के साथ वार्ता की, लेकिन जवाबों से असंतुष्ट प्रदर्शनकारियों ने तालाबंदी जारी रखी।
आंदोलनकारियों के प्रमुख सवाल:
1. मामले में कथित VIP कौन है?
2. दुष्यंत गौतम और अजय कुमार जैसे नाम सामने आने के बावजूद उनसे पूछताछ क्यों नहीं हुई?
3. बुलडोजर कार्रवाई कर साक्ष्य मिटाने के आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
4. छह महीने बाद भी सीबीआई जांच में क्या प्रगति हुई?
5. उर्मिला सनावर, रेनू बिष्ट समेत अन्य लोगों से पूछताछ हुई या नहीं?
6. अंकिता भंडारी के माता-पिता को अब तक सीबीआई ने क्यों नहीं बुलाया?
प्रदर्शन के दौरान जोरदार नारेबाजी हुई — “CBI जवाब दो”, “अंकिता भंडारी को न्याय दो”, “VIP को गिरफ्तार करो”, “दुष्यंत गौतम से पूछताछ कब?” आदि।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कमला पंत, सुजाता पॉल, निर्मला बिष्ट, त्रिलोचन भट्ट, मोहित डिमरी, मनीष केडिया, एडवोकेट अलमास सिद्दीकी, ललित उत्तराखंडी, विनोद कुमार धस्माना समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। त्रिलोचन भट्ट और सतीश धौलखंडी ने जनगीत भी गाए।
वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल अंकिता के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हर बेटी की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और व्यापक होगा।




