पहले अच्छा पड़ोसी बनो ऋषभ पंत -पार्ट -2
मूल गांव ढंडेरा के लोगों का दर्द और पत्रकार अनिल कुमार का सवाल
रुड़की/देहरादून – मुकेश कुमार
क्रिकेटर ऋषभ पंत ने हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उत्तराखंड में जमीन खरीदने में मदद मांगी है। उन्होंने कहा कि वे दिल्ली से अपना बेस शिफ्ट कर अपने मूल राज्य में घर बनाना चाहते हैं और सरकारी दर पर जमीन खरीदने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें राज्य का गौरव बताते हुए मदद का आश्वासन दिया।
लेकिन इस अपील के बाद रुड़की के ढंडेरा (पूर्व में बुचड़ी फाटक) के स्थानीय निवासियों में नाराजगी दिखाई दे रही है। ढंडेरा अब नगर पंचायत है। यहीं ऋषभ पंत का बचपन बीता। यहीं उन्होंने क्रिकेट की शुरुआती शिक्षा ली। उनके पिता स्वर्गीय राजेंद्र पंत ने यहां स्कूल भी चलाया। ढंडेरा रेलवे स्टेशन के सामने उनका पुश्तैनी मकान आज भी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब ऋषभ अच्छा खेलते थे तो मोहल्ला जश्न मनाता था। पत्रकार प्रतिक्रिया मांगते थे और वे खुशी-खुशी देते थे। लेकिन बाद में कई लोगों ने साफ कह दिया कि अब वे कुछ नहीं बोलेंगे। उनका आरोप है कि परिवार की ओर से यह अहसास दिलाया जाता है कि अखबार वाले सिर्फ प्रचार के लिए नाम का इस्तेमाल करते हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, “जब शादी हुई तो ढंडेरा नगर पंचायत अध्यक्ष को भी नहीं बुलाया गया। मसूरी में कार्यक्रम हो तो ढंडेरा वालों को जगह नहीं, लेकिन उत्तराखंड में सरकारी दर पर जमीन चाहिए।”
इसी चर्चा के बीच वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार ने फेसबुक पर सवाल उठाया—
“क्या ऋषभ पंत अच्छे पड़ोसी नहीं हैं?”
यह सवाल सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि मूल गांव के उन लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब है जो ऋषभ को अपना मानते हैं, लेकिन अब खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

ऋषभ पंत उत्तराखंड के गौरव हैं। उन्होंने राज्य का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। जमीन खरीदकर राज्य में बसने की इच्छा सराहनीय है। लेकिन मूल जगह के लोगों से जुड़ाव बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। जमीन की कमी नहीं, अच्छे पड़ोसी बनने की जरूरत है।





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